Fasal Gyan : रबी सीज़न में गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा जरूरत सही समय पर खाद देने की होती है। कई किसान खाद तो डालते हैं लेकिन सही मात्रा और सही समय की जानकारी न होने के कारण फसल पूरी क्षमता से पैदावार नहीं दे पाती। अगर आप चाहते हैं कि आपका गेहूं मजबूत डंठल, अधिक फुटाव और अच्छे दानों वाला तैयार हो, तो खाद का सही मैनेजमेंट सबसे जरूरी हिस्सा है।
गेहूं की फसल शुरुआत से लेकर कटाई तक अलग-अलग चरणों से गुजरती है, और हर चरण में उसे अलग मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। अगर एक बार शुरू में ज्यादा खाद डाल दी जाए या बाद में बिलकुल कम खाद दी जाए, तो फसल के विकास पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से हम यहाँ आपको चरण-दर-चरण बताने जा रहे हैं कि किस समय कौन-सा खाद डालने से पैदावार तेज़ी से बढ़ती है और फसल तंदरुस्त रहती है।
बुवाई के समय कौन-सा खाद डालें?
बुवाई के समय गेहूं की जड़ों को मजबूत बनाना सबसे जरूरी होता है। जड़ें मजबूत होंगी तो फुटाव भी बढ़ेगा और पौधा पूरे सीजन तक तंदुरुस्त रहेगा। इसलिए बुवाई के साथ नत्रजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (K) का बैलेंस जरूरी है। इस समय खेत में डीएपी डालना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है, जिससे बीज अंकुरण तेज होता है। इसके साथ हल्की मात्रा में पोटाश डालने से पौधा शुरू से ही मजबूत बनता है और गिरने की संभावना कम होती है।
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फसल में 20–25 दिन बाद कौन-सा खाद डालें?
इस समय फसल में तेज़ी से फुटाव शुरू होता है। अगर इस समय नत्रजन की कमी रह जाए तो फुटाव आधा ही हो जाता है।यह चरण पैदावार बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण है। पौधे को इस समय ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और यह ऊर्जा उसे यूरिया से मिलती है। यही कारण है कि इस समय यूरिया का टॉप ड्रेसिंग किया जाता है। सही समय पर यूरिया देने से:
- फसल में फुटाव बढ़ता है
- पत्तियाँ गहरी हरी होती हैं
- पौधे की बढ़त तेज़ हो जाती है
अगर सिंचाई उपलब्ध हो तो खाद डालकर तुरंत सिंचाई कर देना बेहतर होता है। इससे खाद जड़ों तक पहुंचती है और पौधा तुरंत उसे सोख लेता है।
बालियाँ बनने से पहले अंतिम खाद
फसल जब 45–50 दिन की होती है तब पौधे में बाली बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बाली की लंबाई और दानों की संख्या इसी समय तय होती है।अक्सर किसान यही गलती करते हैं कि इस चरण में खाद नहीं देते और पैदावार कम हो जाती है। इस समय पौधे को फिर से नत्रजन की जरूरत होती है, ताकि बाली अच्छी तरह भर सके और दाने मोटे व चमकीले बनें। इस चरण में हल्की मात्रा में सल्फर और पोटाश देने से:
- दाने मोटे बनते हैं
- दाना भराव बेहतर होता है
- फसल में रोग कम लगते हैं
अगर खेत में पोटाश की कमी अधिक हो तो फसल हल्की पीली दिखने लगती है, इसलिए इस चरण का खाद बेहद जरूरी है।
कटाई से पहले हल्का स्प्रे
कुछ किसान दाना बनने के समय हल्का फोलियर स्प्रे भी करते हैं जिससे फसल को तुरंत ऊर्जा मिलती है और दाने तेज़ी से भरते हैं। यह स्प्रे तभी करें जब फसल में कमी महसूस हो रही हो।
गेहूं की पैदावार तभी बढ़ती है जब आप खाद को सही समय और सही मात्रा में दें। पूरी खाद एक साथ डालने से नुकसान होता है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से खाद डालना ही सबसे बेहतर तरीका है। खाद डालने के बाद सिंचाई बिल्कुल न रोकें। यदि मिट्टी नम होगी तो पौधे खाद को जल्दी सोखेंगे और फसल की बढ़त तेज हो जाएगी।